Bihar Ki Siyasat: जाति समीकरण से आगे क्या अब रोज़गार और इन्फ्रास्ट्रक्चर बन रहा है मुख्य चुनावी मुद्दा?
ग्राउंड रियलिटी रिपोर्ट: कॉलेज कैंपस और चाय की दुकानों से बउआ बिहारवाला की खास पड़ताल।
### 'हमको परीक्षा का कैलेंडर चाहिए, केवल भाषण नहीं'
पटना यूनिवर्सिटी के व्हीलर सीनेट हॉल के बाहर खड़े अंतिम वर्ष के छात्र प्रकाश कहते हैं — "हमारे माता-पिता के दौर में जो मुद्दे थे, अब हमारी प्राथमिकताएं बदल चुकी हैं। हमें चाहिए कि समय पर डिग्री मिले, भर्ती का विज्ञापन आए और पेपर लीक न हो।"
बउआ बिहारवाला की टीम ने मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर और सहरसा के युवाओं से बात की। सभी का एक सुर में कहना था कि कोई भी पार्टी हो, विकास का ठोस रोडमैप ही उनका भविष्य तय करेगा।
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